मेरा रंग – रूप बिगड़ गया मेरा रंग – रूप बिगड़ गया मेरा प्यार मुझसे बिछुड़ गया
अब ढूँढूँ तुझे मैं कहाँ- कहाँ मेरा यार तू किधर गया
तुम बिन जीना हुआ दुशवार जीवन कण- कण में बिखर गया
कर मुझे तकदीर की बेरुखी के हवाले, मेरा यार तू किधर गया
दीखे न जहाँ से यार की गली क्यों तू ऐसा सफ़र गया
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